शुक्रवार, 22 मई 2026

शाहाबाद गजेटियर का महत्व


शाहाबाद गजेटियर का महत्व
_ लक्ष्मीकांत मुकुल



जिला गजेटियर को प्रकाशित करने की परंपरा अंग्रेजी
शासन-काल में प्रशासकीय दृष्टि को ध्यान में रखकर अधिकारियों को जानकारी प्राप्त कराने के लिए प्रारंभ हुई थी। इसमें जिले का भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सरकारी गतिविधियों की जानकारी रहती थी। स्थान विशेष और जिले की भाषाओं का भी
विवरण इसमें होता था। शाहाबाद गजेटियर का आरंभ तो डब्ल्यू. डब्ल्यू. हंटर द्वारा प्रकाशित बंगाल का सांख्यकीय सर्वेक्षण, भाग-7 सन् 1877 से होता है। परन्तु स्वतंत्र रूप से इसका प्रकाशन 1906 ई० में मारले द्वारा तथा पुर्नप्रकाशन 1924 में जेम्स द्वारा किया गया था। उस समय यह पुस्तक 200 पन्नों की थी। आजादी के बाद 1966 ई० में शाहाबाद गजेटियर परिवद्धित से 957 पन्नों में प्रकाशित हुआ।

शाहाबाद गजेटियर सोलह अध्यायों में विभक्त है। सामान्य, इतिहास, निवासी, कृषि और सिंचाई, उद्योग, बैंकिंग- व्यापार और वाणिज्य, यातायात, आर्थिक संबंध और विविध क्रिया कलाप, सामान्य प्रशासन, कानून व्यवस्था और न्याय, भू-राजस्व प्रशासन,स्थानीयस्वशासी निकाय, शिक्षा और संस्कृति, चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाएँ, सामाजिक सेवायें और प्रसिद्ध स्थल जैसे विषय शामिल हैं।

सामान्य खंड में जिला का नामकरण, भौगोलिक स्थिति, सीमायें, प्राचीन शासकीय इकाई, भौतिक स्वरूप, नदी प्रणाली, झील, पोखरा, झरना, वन्य जीव, प्राकृतिक संपदा और सनिज, खानों की सूची, वनस्पति, जंगल, पंछी, जलवायु, जीव जन्तु, वर्षा, तापमान,आर्द्रता, मेघाच्छादन, वायु गति आदि की विस्तृत जानकारी मिलती है। शाहाबाद का नामकरण बाबर की छावनी नाम पर हुआ। यह भाग पहले करुष देश के नाम से जाना जाता था। शाहाबाद जिला
1765 में बना। ऐसी अनेक बातें इसमें आती हैं। 

इतिहास खंड के क्षेत्र की प्राचीनता, मिथक, असुरों का अत्याचार, दानव-इतिहास, मौर्य युग से गुप्त काल का वर्णन, शशांक का प्रभाव, ह्वेनसांग की यात्रा,
उत्तरगुप्त कालीन राजा जीवित गुप्त का क्षेत्र से, यशोवर्मन, लालित्यादित्य, पाल सम्राज्य, गहड़वालों का प्रभाव - उत्थान, मान सिंह का रोहतास आगमन, अकबर - दलपत - विवाद, अंग्रेजों के बक्सर युद्ध
के बाद का प्रभाव, 1857 का विद्रोह, स्वतंत्रता आंदोलन और 1942 की क्रांति का विस्तृत विवेचन इसमें हुआ है। निवासी खंड में दशकीय जनगणना, पलायन, ग्रामीण एवं शहरी जनसंख्या वर्णन, पुराने
और नये शहरी इलाके जिला मुख्यालय आरा का भौगोलिक - सामाजिक वर्णन, निवासियों की भाषा, भोजपुरी बोली, साहित्य, शाहाबाद में उर्दू का प्रभाव, जैन संस्कृति, जाति, धर्म और समूह,पहाड़ी जन जातियाँ, हिन्दू व मुस्लिम धार्मिक विधान, अंतर्जातीय
संबंध, नये धार्मिक आंदोलन ( आर्य समाज ब्रह्म समाज, ईसाई मिशिनरी), सामाजिक जीवन, मद्य पान और निषेध, पहनावा, घरेलू वस्तुएँ; जैसे- लोढ़ा, सिल, तावा, कोठी, चरपाई, चकरी, जाँत आदि) बर्त्तन, कपड़े, गहने, भोजन- व्यंजन, वाद्ययंत्र और त्योहार आदि है। सामाजिक विवाद (दंगा, बलवा), तीर्थ स्थल, सामाजिक संगठन (रोटरी क्लब, खेल), आर्थिक-पेशेवर-वर्गीय संबंधों का सामाजिक जीवन आदि भी इसमें शामिल हैं। 1961 की तत्कालीन जनगणना
साथ सभी पुराने आँकड़े भी जनसंख्या के प्रचुरता में दिये गये हैं। 1917 ई० के बाद के हिन्दू मुस्लिम दंगों का विस्तृत विवरण भी इसमें मिलता है। कृषि और सिंचाई अध्याय में कृषि योग्य भूमि का विवरण, विविध सिंचाई प्रबंधन (आहर, कुआँ, पइन), सोन नहर
प्रणाली और उसकी शाखाएँ - वितरणियाँ, सिंचाई प्रशासन, पटवन शुल्क, बाँध और लघु सिंचाई व्यवस्था, लिफ्ट सिंचाई योजना, मिट्टी का विविध स्तर, मुख्य फसलें, फल और सब्जियाँ, सरकारी कृषि
फार्म, कृषि से जुड़े उद्योग, फसल विपणन, पशु पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन, जंगली उत्पाद, सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किये गये कार्य इत्यादि हैं। इसी भाग जिला में आयी बाढ़, महामारी, आँधी,
तूफान, आकाल, विक्षुब्धता का इतिहास भी वर्णित है। 
उद्योग खंड में जिला की पुरानी उद्योग परंपरा, बड़े उद्योग धंधे ( डालमिया ग्रुप का सीमेंट, पेपर, चीनी फैक्टरियाँ), सल्फर एसिड प्लांट, राइस मिल, तेल मिल, भवन उद्योग और गिट्टी उद्योग की भी चर्चाएँ की गई हैं। बैंकिग और वाणिज्य भाग में सहकारी बैंकों की गतिविधियों और शाहाबाद में व्यापार के आयात-निर्यात संबंधी विशेषताओं का बखान किया गया है। जिले के बाजारों, गत्तों, मेलें और फुटकर विक्रेताओं
की कार्यशैलियों के बारे में इसमें विविध जानकारी प्राप्त होती है। यातायात में इस क्षेत्र के स्थल मार्ग और जल मार्ग के अनेक तथ्य सामने आते हैं। केन्द्रीय रेलवे के उत्तर और दक्षिण दोनों रेल मार्गों की चर्चा के अलावे निजी कंपनी द्वारा संचालित मार्टिन रेलवे, जो
इतिहास का विषय बन चुकी है। उसके बारे में कई बातें सामने आती हैं। डिहरी - रोहतास लाइट रेलवे, आरा-सासाराम लाइट रेलवे, नदियों के नौका-घाट, स्थानीय हवाई अड्डे और बौलिया- जपला रोपवे जैसे ऐतिहासिक महत्व की चीजों का बड़ा रोचक वर्णन इसमें मिलता है। डाक–तार संचार माध्यमों की जिले में भूमिका भी इससे स्पष्ट होती है। शाहाबाद जिले के आर्थिक संबंधों और उससे जुड़े विविध क्रिया-कलापों के अलावे इसमें सामान्य प्रशासन के पदों,।कार्यों और अधिकारों में विषय में अनेक जानकारियाँ दी गई हैं।

इस पुस्तक का सबसे रोचक खंड भू-राजस्व प्रशासन माना जाता है। इसमें मालगुजारी का मुगल काल के अंतिम समय से अंग्रेजी शासन और उसके बात तक का इतिहास उल्लखित हुआ है। मुगल काल के अंतिम वर्षों में शाहाबाद सरकार और रोहतास सरकार के भू-राजस्व वसूली का गहनता से वर्णन किया गया है।
रिवन्यू प्रशासन 1766-81 के साथ ही वर्षवार बंदोबस्ती के विवरण का खुलासा भी यहाँ पढ़ने को मिलता है। रोहतास सरकार का 1784 में विभाजन, वार्षिक बंदोबस्ती - 1785–87, 1787 में मालगुजारी
वसूली की परेशानी, स्थायी बंदोबस्ती कानून 1793 का प्रभाव, चौसा परगना, 1857 में भूराजस्व वसूली में संकट, बंसकटी महाल, मि० माइलन इस्टेट, परगनों का वसूली विवरण, सर्वे कार्य, जमींदारी उन्मूलन, भू–स्वामियों और रैयतों के बीच के संबंध, मालबुजारी
निर्धारण, वसूली, बकास्त विवाद, भू राजस्व विभाग का संगठन, राजस्व थानों का विवरण, बकास्त भूमि, गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, कृषि भूमि का प्रबंधन, ठीकेदार और गुजास्तादार, भूदान, जमींदारी उन्मूलन का प्रभाव, कैमूर पठार का सर्वेक्षण,
चौकीदारी चकरान जमीन का पठारी व्यवस्था सर्वेक्षण में लगे अधिकारी और कार्य, यू.पी. बिहार सीमा विवाद आदि विषयों का गहनता पूर्वक विवेचन किया गया है। इस पाठ में रोहतास सरकार में रोहतास, चैनपुर और सासाराम परगनों का नाम आता है, तो
शाहाबाद सरकार में भोजपुर, बिहिया, पीरो, नोनौर, आरा, दनवार, दिनारा, पवार और बड़गाँव का नाम आता है। परगनों द्वारा भू राजस्व की यह व्यवस्था 1916 तक थी, इसके बाद राजस्व थाना अस्तित्व में आया। शाहाबाद जिला में ये राजस्व थाना आरा, पीरो,
शाहपुर, बक्सर, डुमरॉव, सासाराम, डिहरी, बिक्रमगंज, करगहर, भभुआ और मोहनिया थे। आजादी के कुछ वर्षों बाद राजस्व अंचलों और राजस्व हल्कों का गठन हुआ। कानून व्यवस्था और न्याय पाठ
में जिले का पुलिस प्रशासन, आपराधिक इतिहास, पुलिस तंत्र के सक्रिय कार्य, जेल व्यवस्था, बक्सर सेंटरल जेल और न्यायपालिका के विविध कार्यों का उल्लेख किया गया है। स्थानीय स्वशासी निकाय में जिला बोर्ड, ग्राम पंचायतों का गठन, नगरपालिका, यूनियन कमिटि, निरीक्षण बंगला आदि का विवेचन इसमें किया गया है।

शिक्षा और संस्कृति अध्याय में जिला में शिक्षा का इतिहास, प्राथमिक–माध्यमिक उच्च प्रौढ़ - बालिका शिक्षा, लाइब्रेरी, म्यूजिम आदि की चर्चा है। चिकित्सा के क्षेत्र में शाहाबाद का पुरातन इतिहास तो मिलता ही है, इसमें आजादी के पूर्व और बाद के जनस्वास्थ्य सुविधाओं, अस्पतालों और स्वास्थ्य जागरूकता का भी विवरण है। सामजिक सेवायें और जनजीवन पाठ में श्रम कल्याण, कृषि मजदूर, औद्योगिक मजदूर, दुकान और व्यापारिक गतिविधियाँ, हास्टल, पेय जल सुविधा, स्वास्थ्य सुविधा कानूनी मदद का वर्णन
तो मिलता ही है, इसमें समाज सेवी संगठन, भारत सेवक समाज, भारत स्कॉट एण्ड गाइड, भूदान आंदोलन, हरिजन सेवक संघ, आर्य समाज, समाज पत्र, आम चुनाव व विधान सभा चुनाव, विधान परिषद
चुनाव ( 1952 से 62 तक), विकास ट्रस्ट, सोसाइटी, बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड व बिहार वक्फ बोर्ड से संबंधित जिले के धार्मिक संस्थाओं का विवरण भी यहाँ मिलता है। इसमें शाहाबाद के सभी प्रसिद्ध और गुमनाम स्थलों की विस्तार से चर्चा की गई है। अघौरा, पाटन, सड़की, वैद्यनाथ, देव व्यणार्क, जारन - तारन, बक्सर व बक्सर किला, डुमरॉव व डुमरॉव राज परिवार, दिनारा, मुंडेश्वरी, कोआथ, शेरगढ़,
मेर, तिलौथू, आरा, मसाढ़ आदि स्थलों की बारीकी से पड़ताल करके बहुत रोचक जानकारियाँ दी गई हैं। कुछ महत्वपूर्ण दर्शनय स्थलों की तस्वीरें भी इसमें शामिल है।

इस महत्वपूर्ण पुस्तक से गुजरते हुए हम शाहाबाद के अनेक गौरवों से परिचित होते हैं। मध्यकालीन भक्त कवि तुलसीदास रघुनाथपुर के निवासी थे, डिहरी में सोन पार करने के लिए नावों पर बांसों की चचरी बनती थी, जिसमें 14,000 बांस लगते थे, जिले की
पुरानी व देशी माप-तौल प्रणाली अअब से कुछ भिन्न थी, जिले में मिलने वाला सबसे बड़ा पंछी 'जिमाच', जो बाजों से लड़ता हैं आदि। 

शाहाबाद गजेटियर का प्रकाशन भले ही उस समय अफसरों को जिले की जानकारी से लबरेज करने के लिए हुआ था । परन्तु,इसका महत्व अब और ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि यह पुस्तक अनेक संदर्भित ग्रंथों, हैण्ड बुकों, यात्रा विवरणों, शोध आलेखों और संबंधित आँकड़ों से भरी है, इसे पढ़ना एक बड़ा और महत्वपूर्ण कार्य लगता है। यह पुस्तक अध्ययनशील व्यक्त्यिों, इतिहास प्रेमियों और शोधार्थियों को दुर्लभ सामग्रियाँ प्रदान करता है, जिस वजह से इसकी उपयोगिता और सार्थकता बनी हुई है।

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